April 19, 2026
The Defence
बड़ी खबर

खंडवा हादसे में संवेदना के नाम पर छलावा: मुआवजे की जगह लिफाफों में निकले कागज और 5000 के चेक”

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में विजयादशमी के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसा हुआ। नदी में ट्रैक्टर पलटने से 11 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। इस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने घटना पर शोक जताया और आर्थिक सहायता की घोषणा की।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये और घायलों को 1-1.5 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की। वहीं प्रधानमंत्री ने भी मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने का ऐलान किया। जनता को उम्मीद थी कि प्रशासन जल्द ही इन परिवारों को राहत देगा।

लेकिन जब मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद खंडवा पहुंचे और मृतकों के परिजनों को लिफाफे सौंपे, तो परिजन यह मान बैठे कि इन लिफाफों में मुआवजे के चेक हैं। जब घर पहुंचकर उन्होंने लिफाफे खोले तो हैरान रह गए — लिफाफों में न तो चेक थे, न ही कोई नकद राशि, बल्कि केवल SDM द्वारा जारी राशि स्वीकृति पत्र था। इससे परिजनों में निराशा और आक्रोश फैल गया।

वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के मंत्री विजय शाह भी अस्पताल पहुंचे और घायलों को लिफाफे थमाए। घायलों को लगा कि यह लिफाफे घोषित मुआवजे के 1.5 लाख रुपये के चेक होंगे, लेकिन जब उन्होंने खोला तो अंदर केवल 5000 रुपये का चेक मिला, जो किसी सरकारी घोषणा का हिस्सा नहीं था। बाद में बताया गया कि यह केवल तत्कालिक सहायता राशि है ताकि घायल लोग शुरुआती खर्च उठा सकें।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता में यह भावना है कि सरकार ने संवेदना के नाम पर छलावा किया। मुख्यमंत्री और मंत्री द्वारा दिए गए लिफाफों में वादा किया गया मुआवजा नहीं मिलने से पीड़ित परिवारों में असंतोष बढ़ गया है।

प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि बड़ी राशि सीधे पीड़ितों के खातों में भेजी जाएगी, परंतु अब तक परिवारों को इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को पीड़ितों के साथ ईमानदारी से पेश आना चाहिए और वादे के अनुसार मुआवजा शीघ्र देना चाहिए।

यह घटना न केवल दुखद है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण भी बन गई है, जहाँ शोक संतप्त परिवार राहत की उम्मीद में अब भी सरकारी मदद का इंतज़ार कर रहे हैं।

Related posts

राहुल और जर्मन चांसलर के स्वागत पर सियासी घमासान, प्राथमिकता को लेकर सरकार पर सवाल

admin

ट्रम्प का नया दांव: ब्रांडेड दवाओं पर 100% टैरिफ, 1 अक्टूबर से लागू; भारत की फार्मा कंपनियों पर दबाव

admin

चिकन की फरमाइश बनी मौत का कारण: गुस्साई मां ने बेलन से बेटे को पीटा, घर पर ही तोड़ा दम

admin

Leave a Comment