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October 21, 2026
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व्हाइट टाइगर सफारी को लेकर खींचतान तेज: रीवा का ऐतिहासिक दावा बनाम मैहर की भौगोलिक दलील

व्हाइट टाइगर सफारी को लेकर रीवा और मैहर के बीच खींचतान गहराती जा रही है। मुकुंदपुर के ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि सफारी को रीवा से जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि रीवा का व्हाइट टाइगर से ऐतिहासिक संबंध रहा है। 1951 में महाराजा मार्तंड सिंह ने दुनिया के पहले सफेद बाघ ‘मोहन’ की खोज यहीं से की थी। इसी कारण रीवा को “व्हाइट टाइगर की धरती” कहा जाता है और ग्रामीण मानते हैं कि यह पहचान सफारी के साथ भी बनी रहनी चाहिए।

इसके विपरीत सतना सांसद और मैहर विधायक का कहना है कि मुकुंदपुर सतना जिले का हिस्सा है। उनका तर्क है कि सफारी का सीधा लाभ सतना और मैहर के लोगों को मिलना चाहिए, न कि रीवा को। नेताओं का मानना है कि यदि सफारी का नाम रीवा से जुड़ा तो स्थानीय जनता अपने अधिकार से वंचित हो जाएगी और क्षेत्र के पर्यटन विकास पर भी असर पड़ेगा।

यह विवाद अब सिर्फ सफारी के नाम या क्षेत्र से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह राजनीति और क्षेत्रीय पहचान का प्रश्न बन चुका है। एक ओर रीवा अपनी गौरवशाली विरासत और ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर मैहर और सतना की जनता अपने हिस्से का विकास और पर्यटन लाभ सुरक्षित करना चाहती है।

यदि सरकार इस विवाद का समाधान संतुलित रूप से नहीं करती, तो इसका असर न केवल पर्यटन परियोजनाओं पर पड़ेगा, बल्कि स्थानीय जनता के बीच असंतोष भी बढ़ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि दोनों क्षेत्रों के हितों को ध्यान में रखकर कोई ऐसा निर्णय लिया जाए, जिससे व्हाइट टाइगर सफारी का सपना विवाद की भेंट चढ़ने के बजाय क्षेत्र के विकास का साधन बन सके।

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