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October 21, 2026
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धर्म

चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत, नहाय-खाय से गूंजे घाट

भारत के पारंपरिक और लोकआस्था से जुड़े सबसे बड़े पर्वों में से एक छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से हो चुकी है। आज से शुरू हुआ यह चार दिवसीय पर्व श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं और पुरुष प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं और सूर्य देव की आराधना करते हैं। नहाय-खाय को इस पर्व की सबसे पहली और पवित्र कड़ी माना जाता है।

नहाय-खाय के अवसर पर व्रती विशेष रूप से शुद्ध सात्विक भोजन बनाते हैं। इस दिन बनने वाले भोजन में लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं किया जाता। परंपरा के अनुसार लौकी-भात, चना दाल, अरवा चावल, आंवला की चटनी और पापड़ जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं। इस प्रसाद को सबसे पहले व्रत रखने वाले व्यक्ति को परोसा जाता है, जिसके बाद ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन करते हैं। यह विधि शुद्धता और श्रद्धा की भावना को दर्शाती है।

इस दिन गेहूं को गंगाजल में धोकर सुखाया जाता है ताकि आगामी दिनों में प्रसाद बनाने में उसका उपयोग किया जा सके। गेहूं की रक्षा की विशेष परंपरा होती है—इसे न किसी पक्षी को छूने दिया जाता है, न किसी और को। परिवारजन पारंपरिक लोकगीत गाते हुए इसकी देखरेख करते हैं।

गंगा और अन्य पवित्र नदियों के घाटों पर आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोग नए वस्त्र पहनकर नदियों में डुबकी लगाते दिखे। भक्ति गीतों की गूंज और पारंपरिक माहौल ने पूरे प्रदेश को छठमय बना दिया है। इसी के साथ चार दिवसीय छठ पर्व — नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की शुरुआत हो चुकी है।

यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि परिवार और समाज में शुद्धता, अनुशासन और एकता का संदेश भी देता है। नहाय-खाय का दिन छठ पूजा की पवित्र यात्रा का पहला और महत्वपूर्ण पड़ाव होता है।

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