छत्तीसगढ़ की एनआरएलएम बीहान योजना से जुड़ी महिलाएं अपने लंबे समय से लंबित अधिकारों और मांगों को लेकर राजधानी रायपुर में सड़क पर उतर आईं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई इन महिलाओं ने राजीव गांधी चौक पर धरना देते हुए सरकार और संबंधित विभागों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है और न ही नौकरी की कोई सुरक्षा।
धरना दे रहीं महिलाओं ने बताया कि उन्हें लगातार बैठक, प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के लिए बुलाया जाता है, लेकिन इसके बदले यात्रा भत्ता, मीटिंग भत्ता या दैनिक भत्ता नहीं दिया जाता। इससे उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा कई अनुभवी महिलाओं को जबरन काम से हटाने के आरोप भी लगाए गए हैं, जिसे उन्होंने पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया।
महिलाओं का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 1910 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो आज के महंगाई भरे दौर में बेहद कम है। कई बार यह राशि 5-6 महीने बाद एकमुश्त मिलती है और वह भी सीधे बैंक खाते में नहीं दी जाती। उन्होंने मांग की है कि मानदेय हर महीने समय पर और सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाए।
इसके साथ ही महिलाओं ने नियुक्ति पत्र और नियमितीकरण की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि वर्षों से काम करने के बावजूद आज तक उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है, जिससे भविष्य असुरक्षित बना हुआ है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि जब तक मंत्री स्तर पर सीधी बातचीत नहीं होती और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
