नागपुर : हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संघ संचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को नागपुर में ब्रह्माकुमारी विश्व शांति सरोवर के 7वें स्थापना दिवस पर बोलते हुए भारत की आर्थिक ताकत और उस पर लगाए जा रहे टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कई देश भारत से दूरी बनाते हैं और आयात-निर्यात में टैरिफ की दीवार खड़ी करते हैं, लेकिन इसकी असली वजह भारत की बढ़ती शक्ति से उनका डर है।
भागवत का बयान
भागवत ने कहा—
आज भारत दुनिया के सामने नए आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। दुनिया जानती है कि यदि भारत मजबूत हुआ तो उनके लिए नई चुनौती खड़ी होगी। इसलिए वे डर के कारण भारत पर टैरिफ लगाते हैं। लेकिन जब सात समंदर की दूरी है तो डर कैसा? असली कारण यही है कि वे सोचते हैं कि भारत यदि आगे बढ़ गया तो उनका क्या होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का इतिहास बताता है कि यह देश कभी आक्रमणकारी नहीं रहा। भारत ने हमेशा “वसुधैव कुटुंबकम्” का भाव जिया है और दुनिया को जोड़ने की कोशिश की है।
भारत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति
भारत हाल के वर्षों में लगातार विश्व व्यापार मंच पर बड़ी भूमिका निभा रहा है।
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भारत ने कई देशों से समझौते किए हैं, जिससे उसकी निर्यात क्षमता बढ़ी है।
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लेकिन कुछ शक्तिशाली देशों ने भारतीय सामान पर उच्च टैरिफ लगा दिया है ताकि उनकी अपनी घरेलू इंडस्ट्री को सुरक्षा मिल सके।
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उदाहरण के तौर पर टेक्सटाइल, स्टील, दवाइयाँ और IT सेवाएँ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ भारत प्रतिस्पर्धी बन रहा है और विकसित देश इसे खतरे के रूप में देख रहे हैं।
भागवत के मुताबिक यही डर उन्हें भारत के खिलाफ व्यापारिक नीतियाँ कठोर बनाने को मजबूर करता है।
भागवत की सोच का व्यापक अर्थ
भागवत का यह बयान केवल आर्थिक संदर्भ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक स्थिति और पहचान से भी जुड़ा है।
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आत्मनिर्भर भारत अभियान : वे मानते हैं कि भारत जितना स्वदेशी और आत्मनिर्भर बनेगा, उतना ही विदेशी ताकतों का दबाव कम होगा।
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आर्थिक राष्ट्रवाद : टैरिफ लगाने से भारत को नुकसान जरूर है, लेकिन यह भारतीय उद्योगों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे सकता है।
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विश्व राजनीति का संकेत : पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत उनकी शर्तों पर खेले। लेकिन भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है, जो उन्हें असहज कर रहा है।
आलोचना और समर्थन
समर्थक मानते हैं कि भागवत ने सही कहा कि भारत की ताकत से दुनिया डर रही है और यही कारण है कि टैरिफ बढ़ाए जा रहे हैं।आलोचक कहते हैं कि व्यापार नीति हमेशा “डर” से नहीं, बल्कि आर्थिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय हित से तय होती है। टैरिफ लगाना कई बार सिर्फ स्थानीय उद्योगों की रक्षा के लिए किया जाता है।
मोहन भागवत का यह बयान भारत के बदलते आत्मविश्वास और विश्व मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। चाहे टैरिफ लगाने का कारण डर हो या आर्थिक हित, यह तय है कि भारत अब दुनिया की नज़र में एक मजबूत खिलाड़ी बन चुका है। भागवत का संदेश स्पष्ट है— भारत का रास्ता “विश्व कल्याण” का है और डर की राजनीति भारत को रोक नहीं सकती।
