रायपुर के तेलीबांधा स्थित आबकारी कार्यालय में लगी आग ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह आग केवल एक सामान्य दुर्घटना नहीं मानी जा रही, क्योंकि जिस कक्ष में आग लगी वहां शराब कारोबार और कथित घोटालों से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें रखी हुई थीं। आग की घटना के बाद इन दस्तावेजों का पूरी तरह जल जाना आम लोगों और सामाजिक संगठनों के बीच संदेह और आक्रोश का कारण बन गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब पहले से ही शराब नीति और उससे जुड़े मामलों की जांच की मांग उठ रही थी, ठीक उसी समय फाइलों का जल जाना महज संयोग नहीं हो सकता। कई लोगों ने इसे सुनियोजित साजिश की आशंका से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका मानना है कि यदि स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं कराई गई, तो सच्चाई सामने आना मुश्किल होगा और दोषी बच निकलेंगे।
दूसरी ओर प्रशासन ने शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह बताया है और विभागीय जांच जारी होने की बात कही है। हालांकि जनभावनाओं को देखते हुए केवल आंतरिक जांच से संतोष नहीं दिख रहा। इस घटना ने सरकारी दफ्तरों में दस्तावेजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस को तेज कर दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच का निष्कर्ष क्या निकलता है और क्या वाकई सच्चाई सामने आ पाएगी या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।
