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October 23, 2026
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देश के कई राज्यों में कमर्शियल गैस संकट, सप्लाई प्रभावित होने से होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर मंडराया संकट

देश के कई राज्यों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से होटल-रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर संकट गहराने लगा है। गैस की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘एसेन्शियल कमोडिटी एक्ट, 1955’ के तहत आपात कदम उठाए हैं, जिससे गैस की उपलब्धता को नियंत्रित किया जा सके। गैस सप्लाई में आई कमी के कारण कई राज्यों में कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई है, जिससे होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

सरकारी फैसले के बाद गैस वितरण को चार श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में घरेलू उपयोग की रसोई गैस (PNG) और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG को रखा गया है, जिन्हें पहले की तरह पूरी आपूर्ति दी जाएगी। दूसरी श्रेणी में खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को लगभग 70 प्रतिशत गैस देने का प्रावधान किया गया है। तीसरी श्रेणी में बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने की बात कही गई है। वहीं चौथी श्रेणी में छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट शामिल हैं, जिन्हें भी उनकी खपत के आधार पर सीमित मात्रा में गैस दी जाएगी।

गैस सप्लाई में कमी का असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब और तेलंगाना सहित कई राज्यों में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में कमर्शियल सिलेंडरों की डिलीवरी प्रभावित होने से होटल और ढाबा संचालकों की परेशानी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में सिलेंडर की कीमत बढ़ने के बावजूद सप्लाई में अनिश्चितता बनी हुई है। राजस्थान में होटल-रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े लोगों ने गैस संकट को बड़ा आर्थिक झटका बताया है, जबकि छत्तीसगढ़ में डीलरों ने आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता देने की बात कही है।

महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में भी कमर्शियल गैस की कटौती की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि राज्य में हजारों होटल और रेस्टोरेंट गैस संकट से प्रभावित हो सकते हैं। वहीं पंजाब और तेलंगाना में भी कमर्शियल सिलेंडरों की बुकिंग और डिलीवरी पर असर देखा जा रहा है।

इस बीच सरकार ने गैस की जमाखोरी रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं। डिलीवरी के समय अब OTP या बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। साथ ही घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के नियमों में बदलाव करते हुए दो सिलेंडरों के बीच का अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार गैस सप्लाई संकट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हैं। मध्य-पूर्व क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ मार्ग पर तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह जलमार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके अलावा ईरान से जुड़े हमलों के कारण कुछ LNG संयंत्रों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है, जिससे गैस की उपलब्धता पर असर पड़ा है।

भारत अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर सप्लाई प्रभावित होने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई बिना बाधा के जारी रखी जा सके।

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