छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट घोटाले से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना ने सबको हिला दिया है। इस घोटाले में आरोपी बनाए गए पटवारी सुरेश मिश्रा ने आत्महत्या कर ली। सुरेश मिश्रा को कुछ समय पहले इस प्रकरण में निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के बाद वह मानसिक तनाव में थे और आखिरकार उन्होंने अपनी बहन के फार्म हाउस में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
खुदकुशी से पहले सुरेश मिश्रा ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें उन्होंने साफ लिखा कि उन्होंने किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की और उन्हें जानबूझकर इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने लिखा कि वह निर्दोष हैं और उन्हें साजिशन इस घोटाले में घसीटा जा रहा है। सुरेश का यह पत्र अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
घटना के बाद बिलासपुर के सकरी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच प्रारंभ हो गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सुरेश मिश्रा को झूठा फंसाने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके पीछे क्या कारण था।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरी व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती है। यदि सुरेश वाकई निर्दोष थे, तो क्या सिस्टम ने उन्हें न्याय देने की कोशिश की? या वे मानसिक दबाव में टूट गए?
