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अंतरिक्ष में इतिहास रचने के बाद शुभांशु शुक्ला की घर वापसी 14 जुलाई को: तकनीकी कारणों से 4 दिन टला मिशन

नई दिल्ली, 11 जुलाई 2025: भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की धरती पर वापसी अब 14 जुलाई 2025 को होगी। नासा ने पुष्टि की है कि एक्सियॉम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद शुभांशु और उनके सहयोगियों की वापसी में तकनीकी और मौसमी कारणों से चार दिन की देरी हुई है। पहले यह मिशन 10 जुलाई को समाप्त होना था, लेकिन अब ड्रैगन कैप्सूल 14 जुलाई को शाम 4:35 बजे (IST) के आसपास आईएसएस से अलग होगा। शुभांशु की इस उपलब्धि ने भारत को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

मिशन का सफर और उपलब्धियां

शुभांशु शुक्ला ने 25 जून 2025 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए उड़ान भरी थी। 28 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून को ड्रैगन अंतरिक्ष यान आईएसएस पर डॉक हुआ। इस मिशन में शुभांशु ने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें बायोमेडिकल साइंस, न्यूरोसाइंस, और अंतरिक्ष में खेती से जुड़े अनोखे प्रयोग शामिल हैं। उन्होंने मूंग और मेथी के बीजों पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव का अध्ययन किया, जिससे वे अंतरिक्ष के पहले भारतीय “किसान” बन गए। मिशन के दौरान उन्होंने पृथ्वी की 230 परिक्रमाएं पूरी कीं और 96.5 लाख किलोमीटर की दूरी तय की।

शुभांशु का योगदान और भारत का गर्व

शुभांशु ने मिशन के दौरान सात स्वदेशी और पांच वैश्विक वैज्ञानिक प्रयोग किए। उनके “स्प्राउट्स प्रोजेक्ट” ने अंतरिक्ष में पौधों के अंकुरण पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव का अध्ययन किया, जो भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है। इसरो प्रमुख को अपडेट देते हुए शुभांशु ने अपने अनुभव को “अद्भुत” और “गतिशील” बताया। उनके परिवार ने लखनऊ में कहा, “हमें गर्व है कि शुभांशु देश का नाम रोशन कर रहे हैं। हम उनकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।”

14 जुलाई को ड्रैगन कैप्सूल के अनडॉक होने के बाद, यह 18-20 घंटे की यात्रा के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। री-एंट्री के दौरान हजारों डिग्री तापमान का सामना करने के लिए कैप्सूल की हीट शील्ड महत्वपूर्ण होगी। लैंडिंग के बाद शुभांशु की मेडिकल निगरानी होगी ताकि अंतरिक्ष यात्रा के प्रभावों का अध्ययन किया जा सके।

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