बिलासपुर हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2025 को एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाकर स्पष्ट कर दिया कि विधवा बहू अपने पुनर्विवाह से पहले तक ससुर से भरण-पोषण पाने की कानूनी अधिकारिणी है। यह फैसला हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 19 के अंतर्गत दिया गया, जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि पति की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी का भरण-पोषण ससुराल पक्ष का दायित्व बनता है।
यह मामला कोरबा जिले से संबंधित है। वर्ष 2006 में चंदा यादव की शादी गोविंद यादव से हुई थी। वर्ष 2014 में एक सड़क दुर्घटना में गोविंद की असामयिक मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु के बाद चंदा अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगीं। लेकिन समय के साथ आर्थिक कठिनाइयों और विवादों ने उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की कि उनके और उनके बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी ससुर की बनती है।
अदालत ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निर्णय दिया कि जब तक चंदा का पुनर्विवाह नहीं होता, तब तक वह अपने ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार हैं। यह फैसला न केवल चंदा के लिए राहत भरा है, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा जो पति की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट से जूझती हैं।
इस निर्णय ने समाज को यह संदेश भी दिया है कि महिलाओं और उनके बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए न्यायपालिका हमेशा सजग है और उनके हितों को सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम उठाती रहेगी।
