छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों की हड़ताल लगातार तेज होती जा रही है। सरकार द्वारा बार-बार चेतावनी और अल्टीमेटम देने के बावजूद कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर डटे हुए हैं। पिछले एक महीने से अधिक समय से करीब 16 हजार कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने अब कठोर कदम उठाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। बलौदाबाजार जिले के 160 और कोरबा जिले के 21 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। दोनों जिलों को मिलाकर अब तक लगभग 200 कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने देर रात सभी जिलों के सीएमएचओ को निर्देश दिए हैं कि जो भी कर्मचारी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे हैं, उन्हें गुरुवार तक व्यक्तिगत आदेश जारी कर सेवा से मुक्त कर दिया जाए। साथ ही जिलों को खाली पदों की सूची तैयार करने और तत्काल नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के भी आदेश दिए गए हैं।
वहीं दूसरी ओर, एनएचएम कर्मचारी सरकार की इस कार्रवाई से और ज्यादा आक्रोशित हो गए हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी कर्मचारी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेगा। कर्मचारियों ने राजधानी रायपुर में “जेल भरो आंदोलन” का ऐलान कर दिया है और इस आंदोलन में शामिल होने के लिए 33 जिलों से कर्मचारियों के जुटने की तैयारी की जा रही है।
इस टकराव ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट और गहरा कर दिया है। सरकार जहां किसी भी हाल में स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित न होने देने के पक्ष में है, वहीं कर्मचारी अपनी मांगों को पूरा करवाने तक पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह संघर्ष प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार की सख्ती, दोनों की परीक्षा साबित होगा।
