September 5, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“EOW की रेड में बेनकाब हुआ शराब सिंडिकेट, रिटायर्ड IAS निरंजन दास गिरफ्तार”

छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित शराब घोटाला धीरे-धीरे अपनी जड़ों से उखड़ रहा है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने हाल ही में रिटायर्ड IAS अधिकारी निरंजन दास को गिरफ्तार कर यह साबित कर दिया कि इस नेटवर्क में बड़े अफसर भी शामिल थे। यह मामला केवल घोटाले की रकम का नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की पारदर्शिता और जनता के विश्वास का है।

सिंडिकेट का गठन

इस घोटाले में टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर जैसे नाम भी जुड़े हैं। आरोप है कि इन सबने मिलकर एक संगठित सिंडिकेट तैयार किया, जिसने टेंडर प्रक्रिया से लेकर शराब बिक्री तक पूरे तंत्र को अपने कब्जे में ले लिया।

टेंडर की शर्तें बदलकर कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ दिलाया गया।

नकली होलोग्राम छपवाकर अवैध शराब को वैध दिखाया गया।

हर स्तर पर अधिकारियों और कारोबारियों की सांठगांठ उजागर हुई।

निरंजन दास की भूमिका

पूर्व आबकारी आयुक्त रह चुके निरंजन दास पर आरोप है कि उन्हें हर महीने लगभग ₹50 लाख बतौर कमीशन मिलता था।

वे टेंडर पास कराने और ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने में केंद्रीय भूमिका निभाते थे।

पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को वैधानिकता का रूप देने में उन्होंने अपना प्रशासनिक अनुभव इस्तेमाल किया।

सिंडिकेट में उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि हर डील उनके इशारे पर ही होती थी।

आर्थिक नुकसान

इस भ्रष्टाचार से राज्य सरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

नकली होलोग्राम और अवैध बिक्री से राजस्व में भारी गिरावट आई।

शराब कंपनियों को अनुचित लाभ देकर प्रतिस्पर्धा का माहौल बिगाड़ा गया।

अंततः यह बोझ अप्रत्यक्ष रूप से आम जनता की जेब से पूरा हुआ।

EOW की कार्रवाई

लंबी जांच के बाद EOW ने निरंजन दास को गिरफ्तार किया। चार्जशीट में उनकी संलिप्तता के पर्याप्त सबूत बताए गए हैं। अब अदालत की कार्यवाही शुरू हो चुकी है और अन्य सहयोगियों की भूमिका पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।

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