April 17, 2026
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चारधाम यात्रा के शीतकालीन चरण को लेकर तैयारी शुरू: तीर्थ पुरोहितों ने दिए 8 बड़े सुझाव, बोले—धर्मस्थलों का माहौल रहे पवित्र और व्यवस्थाएं हों दुरुस्त

देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का शीतकालीन चरण शुरू होने से पहले ही तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। चारधाम तीर्थ पुरोहित महासभा के सदस्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यात्रा संचालन को अधिक सुचारू, सुरक्षित और धार्मिक माहौल में संपन्न कराने के लिए आठ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि यदि इन बिंदुओं पर अमल किया गया, तो इस बार यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है।

महासभा के सदस्यों ने पर्यटन सचिव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें यात्रा मार्गों की मरम्मत से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक वातावरण बनाए रखने तक की बातें शामिल थीं। पुरोहितों ने सरकार से मांग की है कि यात्रा मार्गों पर बिजली, पानी, संचार, शौचालय और सुरक्षा की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि शीतकालीन पूजा स्थलों पर शाम की आरती का सीधा प्रसारण किया जाए ताकि दूर-दराज के श्रद्धालु भी इसका लाभ उठा सकें। साथ ही, चारधाम मार्गों के आसपास मांस और मदिरा की दुकानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की गई है, जिससे यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बना रहे।

तीर्थ पुरोहितों ने बर्फबारी के समय यात्रा को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए पर्याप्त मशीनों और संसाधनों की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया है। उन्होंने स्थानीय लोगों के सहयोग से धार्मिक समारोहों के आयोजन का सुझाव दिया ताकि क्षेत्रीय संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा मिले।

महासभा ने पड़ोसी तीर्थ स्थलों और देवस्थानों के प्रचार-प्रसार पर भी बल दिया है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इन स्थानों तक पहुंच सकें। इसके अलावा, तुंगनाथ यात्रा के दौरान चंद्रशिला जाने पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने 2024 में शीतकालीन चारधाम यात्रा की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य चारों धामों की यात्रा को 12 महीने तक संचालित रखना है। शीतकाल के दौरान केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद होने के बाद उनके विग्रह स्वरूप शीतकालीन गद्दी स्थलों पर विराजमान होते हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन का लाभ उठाते हैं।

सरकार और तीर्थ पुरोहितों की यह पहल न केवल धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को भी मजबूती प्रदान करेगी।

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