छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में धान खरीदी केंद्रों पर सामने आई गंभीर लापरवाही के मामलों के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सहकारिता विभाग की जांच में कई केंद्रों पर अनियमितताएं पाए जाने के बाद तीन समिति प्रबंधकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि दो अन्य से वित्तीय प्रभार वापस ले लिया गया है। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जांच में यह सामने आया कि कई समितियों में सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा था। किसानों द्वारा लाए गए धान की गुणवत्ता की जांच किए बिना ही उसे सीधे सरकारी बोरों में भरकर तौल किया जा रहा था। इससे न केवल शासन के नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि किसानों के हितों को भी नुकसान पहुंचा।
सहकारिता विभाग के निरीक्षण के दौरान धान खरीदी के कार्य में व्यापक लापरवाही, निर्देशों की अनदेखी और प्रक्रिया में अनियमितता उजागर हुई। इस पर जमरगुड़ी सेवा सहकारी समिति के सहायक समिति प्रबंधक और धान खरीदी प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके वित्तीय अधिकार समाप्त कर दिए गए।
इसी तरह अन्य समितियों में भी नोटिस का जवाब नहीं देने पर सहायक समिति प्रबंधकों और प्रभारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। कुछ केंद्रों पर अधिकारियों के खिलाफ गाली-गलौज और धमकी देने की शिकायतें भी सामने आईं, जिन्हें जांच में सही पाया गया।
प्रशासन का कहना है कि किसानों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसमें पारदर्शिता व ईमानदारी अनिवार्य है। आगे भी यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
