छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि शरिया कोर्ट कानूनी अदालत नहीं है। इसलिए वह किसी पति-पत्नी के रिश्ते को खत्म करने या तलाक का कानूनी फैसला नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक संस्थाएं सिर्फ सलाह या राय दे सकती हैं, अंतिम कानूनी फैसला अदालत ही करेगी। यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
