बिलासपुर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पक्षकारों के बीच आपसी सहमति या समझौता हुए बिना लोक अदालत किसी मामले का निपटारा नहीं कर सकती। यह मामला CSPDCL से जुड़े एक मुआवजा विवाद का था, जिसमें काम के दौरान हुई मौत के बाद मुआवजा देने की जिम्मेदारी से ठेकेदार को राहत दी गई थी। हाईकोर्ट ने 2014 में लोक अदालत द्वारा दिए गए उस अवॉर्ड को रद्द कर दिया और मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
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