छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियमों की अनदेखी कर अधिग्रहित भूमि की खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है। यह प्रकरण शासन की नीतियों और प्रशासनिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना का विवरण:
1 अगस्त 2025 को कोरबा से एक गंभीर अनियमितता सामने आई, जहां अधिग्रहित भूमि पर प्रतिबंध के बावजूद उप पंजीयक द्वारा भूमि के टुकड़े कर उनकी बिक्री की अनुमति दे दी गई। शासन ने जिस जमीन को पहले ही अधिग्रहित कर लिया था, उसकी खरीद-बिक्री नियमों के विरुद्ध मानी जाती है।
इस मामले के खुलासे के बाद कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उप पंजीयक को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यदि जवाब असंतोषजनक पाया गया या समय पर नहीं दिया गया, तो एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि और विस्तार:
यह मामला ग्राम रतलिया का है, जहां एसईसीएल की कोयला खदान के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी। अधिग्रहण के बाद उस भूमि की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। बावजूद इसके, ग्राम रतलिया निवासी भूस्वामी और उप पंजीयक की मिलीभगत से भूमि की बिक्री की गई, जो स्पष्ट रूप से सरकारी आदेशों की अवहेलना है।
