नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को 31 दिसंबर 2024 तक भारत में रहने की अनुमति होगी।
इससे पहले यह सीमा सिर्फ 31 दिसंबर 2014 तक आने वालों के लिए लागू थी। यानी 2015 से 2024 के बीच आने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता तो नहीं मिलेगी, लेकिन उन्हें देश से निकाला भी नहीं जाएगा और वे कानूनी सुरक्षा में रहेंगे।
गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर कहा कि यह फैसला उन शरणार्थियों के लिए राहत है जो अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए हैं। अब इन्हें पासपोर्ट और वीज़ा की शर्तों से छूट दी जाएगी।
क्या है अहम बातें:
- 2014 तक आए लोगों को ही नागरिकता का अधिकार मिलेगा।
- 2015 से 2024 तक आने वाले लोग भारत में रह सकेंगे और गिरफ्तारी से बचेंगे।
- आदेश Immigration और Foreigners Act, 2025 के तहत जारी किया गया।
- गृह मंत्रालय का दावा—हजारों शरणार्थियों को राहत मिलेगी।
विपक्षी दलों ने इस कदम पर सवाल उठाए, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में।
जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया:
इस फैसले से देशभर में बहस छिड़ गई है। समर्थक इसे मानवीय कदम बता रहे हैं तो विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ का प्रयास कह रहा है। असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में खासा विरोध है। वहीं दिल्ली और राजस्थान में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू समुदाय ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है।
