भारत में विजयादशमी केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। हर वर्ष रावण दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। लेकिन इस बार बिलासपुर में यह पर्व केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
विवाद का कारण:
अरपांचल लोक मंच लंबे समय से सरकंडा स्थित साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन करता आया है। मंच ने इस वर्ष भी अनुमति के लिए आवेदन दिया था, परंतु प्रशासन ने मैदान किसी अन्य व्यक्ति/समूह को आवंटित कर दिया। इससे मंच के पदाधिकारियों में रोष फैल गया और उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया।
मंच की नाराज़गी:
मंच के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर स्पष्ट किया कि वर्षों की परंपरा को अचानक बदलना अस्वीकार्य है। उनका कहना है कि यदि उन्हें अनुमति नहीं दी गई तो वे “सर्व हिंदू समाज” के बैनर तले आंदोलन करेंगे। साथ ही, यह भी ऐलान किया कि भले ही जेल जाना पड़े, लेकिन रावण दहन वहीं किया जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी:
अब तक प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। इस मौन ने ही विवाद को और बढ़ा दिया है। मंच का आरोप है कि अनुमति देने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और यह पूरे समाज की भावनाओं से खिलवाड़ है।
सामाजिक और राजनीतिक असर:
त्योहार जैसे सांस्कृतिक आयोजनों पर जब विवाद होता है तो समाज में असंतोष बढ़ता है। बिलासपुर का यह मामला केवल आयोजन स्थल का झगड़ा नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, परंपरा और समाज की आस्थाएँ आपस में टकरा रही हैं। यह विवाद आने वाले समय में आंदोलन या न्यायालय तक पहुँच सकता है।
