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October 24, 2026
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छत्तीसगढ़

रावतपुरा मेडिकल कॉलेज घूसकांड: CBI चार्जशीट में RERA चेयरमैन संजय शुक्ला समेत कई बड़े नाम

रायपुर। रावतपुरा मेडिकल कॉलेज घूसकांड ने प्रदेश में शासन और प्रशासन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में सीबीआई ने अदालत में जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें पूर्व आईएफएस अधिकारी और वर्तमान रेरा (Real Estate Regulatory Authority) चेयरमैन संजय शुक्ला समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। इसके बावजूद, वे लगातार रेरा की अदालत में बैठकर निर्णय सुना रहे हैं।

सीबीआई ने 30 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और 28 अगस्त को अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। एफआईआर और चार्जशीट के बाद सामान्यतः किसी अधिकारी पर कार्रवाई अपेक्षित होती है, लेकिन इस बीच रेरा में करीब 137 केसों की सुनवाई हुई और 50 से अधिक मामलों में फैसले भी दिए गए। इन सभी निर्णयों में संजय शुक्ला सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

चार्जशीट पेश होने के तुरंत बाद भी उन्होंने 3 सितंबर को दो अहम मामलों की सुनवाई की। पहला मामला अग्रवाल कंस्ट्रक्शन एंड कांट्रैक्टर्स बनाम हरबंश सिंह बतरा का था, जबकि दूसरा मामला हाउसिंग बोर्ड से जुड़ा था। दोनों ही मामलों में शुक्ला ने सक्रिय रूप से निर्णय सुनाए। इससे यह सवाल उठता है कि गंभीर आरोपों के बावजूद उन्हें अपने पद से हटाने या निलंबित करने की कोई पहल क्यों नहीं हुई।

रावतपुरा मेडिकल कॉलेज घूसकांड की जड़ें काफी गहरी हैं। इसमें अतिरिक्त सीटें हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी हुई। चार्जशीट में रावतपुरा सरकार उर्फ रविशंकर महाराज, मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अतिन कुंडु, कॉलेज डायरेक्टर अतुल तिवारी, गीतांजलि यूनिवर्सिटी उदयपुर के पूर्व रजिस्ट्रार मयूर रावल, टेक्निफाई सॉल्यूशंस कंपनी और एनएमसी प्रोजेक्ट डायरेक्टर आर. रंदीप नायर जैसे नाम शामिल हैं।

सबसे अहम बात यह है कि एफआईआर और चार्जशीट दर्ज होने के बावजूद न तो संजय शुक्ला की गिरफ्तारी हुई है और न ही राज्य सरकार ने उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। संवैधानिक पद पर बैठे रेरा चेयरमैन के खिलाफ राजभवन से भी कोई दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। यह पूरा घटनाक्रम प्रदेश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े करता है।

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