रायपुर | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य शासन की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों में सीधी भर्ती (Direct Recruitment) का रास्ता खोला गया था। अदालत ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के खाली पद केवल प्रमोशन (Promotion) के जरिए ही भरे जाएंगे। कोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है।
मामला था क्या ?
हाल ही में राज्य शासन ने अधिसूचना जारी की थी कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी और स्टाफ के कई पदों को सीधी भर्ती से भरा जाएगा। इसके खिलाफ कई डॉक्टरों और एसोसिएशनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सीधी भर्ती से उनकी वरिष्ठता और प्रमोशन के अधिकार प्रभावित होंगे।
हाईकोर्ट का फैसला
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हाईकोर्ट ने शासन की अधिसूचना को खारिज करते हुए कहा कि नियमों के अनुसार कॉलेजों में पद पदोन्नति प्रक्रिया से ही भरे जाने चाहिए।
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अदालत ने माना कि सीधी भर्ती से सेवा शर्तों और वरिष्ठ डॉक्टरों के अधिकारों का हनन होता।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों पर केवल प्रमोशन से ही नियुक्तियां होंगी।
याचिकाकर्ताओं की दलील
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वरिष्ठ डॉक्टरों ने तर्क दिया कि सीधी भर्ती से उनके प्रमोशन रुक जाएंगे और उनका वर्षों का अनुभव दरकिनार हो जाएगा।
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उन्होंने कहा कि इससे सेवा में असमानता और असंतोष बढ़ेगा।
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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अगर सरकार को स्टाफ की कमी दूर करनी है तो उसे पदोन्नति की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए, न कि बाहर से भर्ती करनी चाहिए।
शासन का पक्ष
राज्य शासन ने अदालत को बताया कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी है।
सीधी भर्ती से योग्य और नए डॉक्टरों को नियुक्त किया जा सकता है। इसका उद्देश्य मरीजों और मेडिकल शिक्षा दोनों में सुधार करना था। लेकिन अदालत ने इसे नियमों और सेवा शर्तों के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया।
फैसले का असर
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वरिष्ठ डॉक्टरों को फायदा – अब उन्हें प्रमोशन का रास्ता मिलेगा।
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नई भर्ती पर रोक – सीधी भर्ती से नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को झटका।
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फैकल्टी की कमी का संकट – कॉलेजों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
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नीति पर सवाल – सरकार को अब नई रणनीति बनानी होगी ताकि कॉलेजों में पढ़ाई और इलाज प्रभावित न हो।
मेडिकल एजुकेशन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमोशन नीति सही है लेकिन फैकल्टी की कमी भी गंभीर मुद्दा है। सरकार को समयबद्ध प्रमोशन और नियमित कैडर रिव्यू करना चाहिए। सीधी भर्ती पूरी तरह बंद कर देने से भविष्य में शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
