ग्वालियर नगर निगम की बैठक में उस समय असामान्य दृश्य देखने को मिला, जब कई महिला पार्षदों की जगह उनके पति कुर्सी पर बैठ गए। यह देखकर जिलाधिकारी (DM) ने तुरंत हस्तक्षेप किया और सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा—“पहले कुर्सी से उठो और पीछे बैठो, यह जगह पार्षदों की है।”
DM की इस कार्रवाई ने पूरे बैठक कक्ष का माहौल बदल दिया। महिला पार्षदों को सामने आकर अपनी भूमिका निभाने का मौका मिला। प्रशासन का यह कदम न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है बल्कि यह भी साबित करता है कि चुने हुए प्रतिनिधियों की जगह किसी और को जिम्मेदारी निभाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अक्सर देखा जाता है कि महिला पार्षद चुनाव जीतने के बाद भी सक्रिय राजनीति में कम भाग लेती हैं और उनके पति या परिवार के पुरुष सदस्य ही फैसले लेते हैं। इसे “प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व” कहा जाता है, जो लोकतंत्र की आत्मा के विपरीत है।
ग्वालियर में DM का यह कदम महिला नेताओं को आगे बढ़ने और जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करेगा। इस तरह की सख्ती से महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी बढ़ेगी और राजनीति में उनकी पहचान और मजबूत होगी।
