रायपुर: छत्तीसगढ़ में आज हुई राज्य कैबिनेट की अहम बैठक से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें थीं। कर्मचारियों को भरोसा था कि सरकार उनकी लंबित मांगों—जिनमें बर्खास्त कर्मियों की बहाली, मानदेय वृद्धि और सेवाओं के नियमितीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं—पर कोई सकारात्मक निर्णय लेगी।
लेकिन बैठक समाप्त होने के बाद जब एजेंडे की जानकारी सामने आई, तो कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। बैठक में NHM कर्मचारियों से जुड़ा कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिससे उनके बीच मायूसी और नाराजगी का माहौल बन गया।
पिछले कई महीनों से NHM कर्मी अपनी मांगों को लेकर सरकार से वार्ता और आंदोलन कर रहे हैं। बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली को लेकर लगातार ज्ञापन और धरने भी दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार की चुप्पी से उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं और वे अब आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही है, जबकि निर्णय नहीं ले रही।
कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया:
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो वे राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने चेताया कि लगातार अनदेखी से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
NHM कर्मियों को एक बार फिर सरकार से निराशा हाथ लगी है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं—क्या वह कर्मचारियों की मांगें मानेगी या फिर आंदोलन की आहट तेज होगी।
