April 18, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

जनजातीय परंपरा को नई पहचान: छत्तीसगढ़ सरकार करेगी बैगा, गुनिया और हड़जोड़ का वार्षिक सम्मान

रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और परंपरा को सहेजने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री बैगा-गुनिया-हड़जोड़ सम्मान योजना’ को अमल में लाने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के उन व्यक्तियों को, जो पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सा पद्धति से वर्षों से समाज की सेवा कर रहे हैं, हर वर्ष ₹5,000 की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर 2024) के अवसर पर इस योजना की घोषणा की थी, और अब आदिम जाति विकास विभाग द्वारा इसे लागू कर दिया गया है। विभाग ने 6 नवंबर 2025 को विस्तृत अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि यह योजना ‘मुख्यमंत्री बैगा, गुनिया-हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति वर्ग)’ के नाम से जानी जाएगी।

इस योजना का उद्देश्य जनजातीय समुदायों में पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सा प्रणाली को सहेजना और उसे संस्थागत मान्यता देना है। छत्तीसगढ़ के कई जनजातीय बहुल इलाकों में आज भी बैगा, गुनिया और हड़जोड़ लोग अपने स्थानीय ज्ञान से लोगों का इलाज करते हैं। वे जड़ी-बूटियों और पारंपरिक उपचार विधियों के माध्यम से ग्रामीणों की बीमारियों का इलाज करते हैं, जो उनकी गहरी प्रकृति-संबंधी समझ को दर्शाता है।

राज्य सरकार का मानना है कि इन जनजातीय वैद्यों की भूमिका समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके ज्ञान और अनुभव को न केवल सहेजना चाहिए बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलना चाहिए ताकि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके। यही कारण है कि अब जो भी व्यक्ति पिछले तीन वर्षों से वनौषधीय चिकित्सा सेवा कार्य में सक्रिय हैं, उन्हें पहचान कर हर वर्ष ₹5,000 की सम्मान राशि दी जाएगी।

आदिम जाति विकास विभाग की अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि इस योजना का एक अन्य उद्देश्य जनजातीय ज्ञान के दस्तावेजीकरण और संरक्षण को बढ़ावा देना है। इससे इन परंपरागत चिकित्सकों के अनुभव को लिखा और आगे की पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सकेगा।

यह योजना मुख्यमंत्री साय की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें विकास के साथ-साथ संस्कृति और परंपरा के संरक्षण को भी समान महत्व दिया गया है। आधुनिकता के दौर में जब पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं, तब यह योजना न केवल सम्मान बल्कि संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है।

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