छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में मंगलवार को इंद्रावती बचाव संघर्ष समिति और भारतीय किसान यूनियन संघ के सैकड़ों किसानों ने कलेक्टरेट कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने पहले लाल बाग मैदान में धरना दिया, फिर हाथों में तिरंगा लेकर रैली निकाली और कलेक्टरेट पहुंचकर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।
किसानों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मुख्य गेट के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया।
किसानों की प्रमुख मांगें (11 सूत्रीय ज्ञापन)
किसानों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कई अहम मांगें उठाईं—
- मक्का फसल का MSP 2400 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं रखा जाए और खरीद पर प्रशासनिक निगरानी रहे।
- पंजीकृत किसानों को 60 वर्ष की आयु पर पेंशन और कम से कम 2 लाख रुपये का जीवन बीमा मिले।साथ ही, किसान (KCC) ऋणदाता की मृत्यु पर ऋण माफ किया जाए।
- खाद और दवाइयों पर लगने वाला GST तुरंत समाप्त किया जाए।
- बोधघाट परियोजना को पूरी तरह निरस्त किया जाए।
- वनोपज की खरीद केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ही की जाए।
- इंद्रावती नदी पर बने सभी डैम खोलने से पहले किसानों को समय पर सूचना दी जाए।
- सभी जर्जर डैम, सहायक नालों व तटबंधों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
- किसानों के नाम पर अन्य लोगों द्वारा बैंकों से फर्जी ऋण लेने की जांच की जाए।
- आदिवासी भूमि संरक्षण कानून बनाकर भू-माफिया पर नियंत्रण किया जाए।
- वन अधिकार पत्र (पट्टा) धारकों के KCC और धान खरीदी में बहाली की जाए।
- खरीफ वर्ष 2025 के पंजीयन और फसल रकबा संशोधन कार्य को समय पर पूरा किया जाए।
बोधघाट परियोजना को लेकर किसानों का विरोध
किसानों ने स्पष्ट कहा कि—
हमारी जमीन हमें ही चाहिए। सरकार हमारी भूमि पर परियोजना लागू न करे। जिस क्षेत्र में बोधघाट परियोजना शुरू की जा रही है, वहां की 18 पंचायतों के ग्रामीण प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना बंद नहीं हुई तो आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन का पक्ष
अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा: कुछ मुद्दे केंद्रीय सरकार के स्तर के हैं। कुछ स्थानीय समस्याएं हैं जिनका समाधान जिला प्रशासन अपने स्तर पर करेगा किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से निपटाने का प्रयास किया जाएगा
