छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर फैल गई है। रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार के दौरान भावुक माहौल देखने को मिला। शुक्ल के बेटे शाश्वत शुक्ल ने उन्हें मुखाग्नि दी, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पार्थिव शरीर को कंधा देकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार कुमार विश्वास सहित अनेक साहित्यप्रेमी, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विनोद कुमार शुक्ल को हाल ही में देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने हिंदी साहित्य को अपनी सरल, संवेदनशील और मानवीय भाषा से नई ऊँचाइयाँ दीं। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
