छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने वाले गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार अब किसी भी मंत्री, विधायक, सांसद, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या पुलिस अफसर के सामान्य दौरे, निरीक्षण, समीक्षा बैठक, कार्यक्रम या आगमन-प्रस्थान के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था ब्रिटिश काल की औपनिवेशिक परंपरा का हिस्सा रही है, जिसका वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई औचित्य नहीं रह गया है। गार्ड ऑफ ऑनर में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है, जिससे कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होते हैं।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय और राजकीय महत्व के आयोजनों में सलामी की परंपरा पहले की तरह जारी रहेगी। स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के अवसर पर आयोजित परेड और समारोहों में गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके अलावा संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों या विशेष परिस्थितियों में सलामी देने का प्रावधान यथावत रहेगा।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से न केवल पुलिस बल का समय और संसाधन बचेंगे, बल्कि इससे शासन की छवि भी अधिक जनोन्मुखी और सादगीपूर्ण बनेगी।
