छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के बंगरसिया क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। जंगल से निकलकर हाथी रात के समय धान खरीदी केंद्रों पर पहुंच रहे हैं और खुले में रखी धान की बोरियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बीते 10 दिनों में ही हाथियों ने 76 बोरियों का धान खा लिया या बर्बाद कर दिया, जिससे ग्रामीणों और किसानों में भारी चिंता और नाराज़गी है।
ग्रामीणों के अनुसार हाथी शाम ढलते ही जंगल से निकलकर धान मंडी की ओर बढ़ते हैं। 28 दिसंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे तीन हाथियों का एक दल बंगरसिया धान खरीदी केंद्र तक पहुंचा। इनमें से एक हाथी 1-2 बोरी धान खाने के बाद जंगल की ओर लौट गया, जबकि दो अन्य हाथी मंडी के पास झाड़ियों में छिपकर खड़े रहे और मौके का इंतजार करते रहे। रात भर यह सिलसिला चलता रहा—हाथी आते, धान खाते और फिर लौट जाते।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग और ग्रामीणों ने मिलकर अलग-अलग स्थानों पर टीम बनाकर पहरा लगाया। ग्रामीण हाथों में टॉर्च लेकर हाथियों को डराने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब हाथी टॉर्च की रोशनी से भी नहीं डर रहे। कई बार वे लोगों की मौजूदगी के बावजूद धान की बोरियों तक पहुंच जाते हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
लगातार हो रहे नुकसान से परेशान ग्रामीण रात 8 बजे के बाद से ही अलर्ट मोड में आ जाते हैं और सुबह 4 बजे तक धान खरीदी केंद्रों पर ही डटे रहते हैं। वन विभाग की मदद से 3-4 लोगों की टीमें बनाकर निगरानी की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद हाथियों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो नुकसान और बढ़ सकता है। हाथियों की बढ़ती आवाजाही से न सिर्फ फसल और धान सुरक्षित नहीं है, बल्कि लोगों की जान को भी खतरा बना हुआ है। वन विभाग से मांग की जा रही है कि हाथियों को जंगल की ओर सुरक्षित रूप से वापस भेजने और धान खरीदी केंद्रों की बेहतर सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
