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October 22, 2026
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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग को नया नेतृत्व: अमिताभ जैन बने मुख्य सूचना आयुक्त, उमेश कुमार अग्रवाल और डॉ. शिरीष मिश्रा को सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य सूचना आयोग को और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्यपाल के निर्देश पर जारी अधिसूचना के तहत पूर्व मुख्य सचिव अमिताभ जैन को राज्य का नया मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही सेवानिवृत्त आईएएस उमेश कुमार अग्रवाल और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शिरीष चंद्र मिश्रा को सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है।

इन नियुक्तियों को सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में अहम माना जा रहा है। शासन का उद्देश्य राज्य में पारदर्शिता को मजबूत करना और जनता को समय पर सूचना उपलब्ध कराना है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन सभी पदों की सेवा शर्तें, वेतन और भत्ते भारत सरकार की 24 अक्टूबर 2019 की अधिसूचना के तहत तय किए जाएंगे।

यह अधिसूचना “सूचना का अधिकार (केंद्रीय एवं राज्य सूचना आयोगों में पदावधि, वेतन, भत्ते एवं सेवा की अन्य शर्तें) नियम, 2019” के अंतर्गत लागू होगी। इसके तहत नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया और कार्यप्रणाली निर्धारित की गई है, ताकि आयोग का संचालन पारदर्शी और सुचारु ढंग से हो सके।

अमिताभ जैन को मुख्य सूचना आयुक्त बनाए जाने को प्रशासनिक अनुभव का बड़ा लाभ माना जा रहा है। वे राज्य के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं और प्रशासनिक व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। शासन का मानना है कि उनके अनुभव से सूचना आयोग की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।

वहीं सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किए गए उमेश कुमार अग्रवाल का लंबा प्रशासनिक अनुभव है। दूसरी ओर, डॉ. शिरीष चंद्र मिश्रा पत्रकारिता और जनसंपर्क के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम हैं। इन दोनों की नियुक्ति से आयोग में प्रशासनिक और मीडिया दृष्टिकोण का संतुलन बनेगा, जिससे जनता की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

राज्य सूचना आयोग का मुख्य उद्देश्य जनता को सूचना का अधिकार दिलाना और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। सूचना आयुक्तों की भूमिका आरटीआई से जुड़ी अपीलों और शिकायतों की सुनवाई करना तथा समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना होती है। नए पदाधिकारियों के आने से लंबित मामलों के तेजी से निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है।

शासन के स्तर पर यह भी कहा गया है कि इन नियुक्तियों से आयोग की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ेगी। इससे आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं, नीतियों और निर्णयों के बारे में सही और स्पष्ट जानकारी मिलने में आसानी होगी।

इन नियुक्तियों के साथ यह संदेश भी गया है कि सरकार सूचना के अधिकार को गंभीरता से ले रही है। जनता और सामाजिक संगठनों को उम्मीद है कि अब आरटीआई से जुड़े मामलों में देरी कम होगी और जवाबदेही बढ़ेगी। राज्य में पारदर्शी शासन और सुशासन की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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