छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अभद्र भाषा और आपत्तिजनक पोस्टों का मामला सुर्खियों में है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ सोशल मीडिया पर गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वाले आरोपी को रायपुर पुलिस ने भिलाई से गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां आरोपी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी।
आरोपी की पहचान अमित सेन के रूप में हुई है, जिसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भूपेश बघेल के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए पोस्ट साझा की थी। यह पोस्ट वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद एनएसयूआई (NSUI) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
एनएसयूआई अध्यक्ष शान्तनु झा के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ता और प्रदेश पदाधिकारी 27 जनवरी को सिविल लाइन थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं के खिलाफ इस तरह की भाषा न केवल असंवैधानिक है, बल्कि समाज में नफरत और असहिष्णुता को बढ़ावा देती है। इसलिए आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 352, 353(2) और 356 के तहत मामला दर्ज किया और 29 जनवरी को आरोपी अमित सेन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस कार्रवाई के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सोशल मीडिया की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी कितनी जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर की जाने वाली अभद्र भाषा न केवल कानून के दायरे में आती है, बल्कि समाज में वैमनस्य और तनाव भी पैदा करती है। यह कार्रवाई एक संदेश के रूप में देखी जा रही है कि सोशल मीडिया पर की गई हर गतिविधि कानून के दायरे में है और आपत्तिजनक भाषा के लिए जवाबदेही तय की जाएगी।
