छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर डी.एड अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। राजधानी रायपुर के तुता धरना स्थल पर पिछले कई दिनों से अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत खाली पड़े पदों पर शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए। सरकार की ओर से ठोस निर्णय न लिए जाने के कारण अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब विधानसभा में पूछे गए सवालों के बावजूद भर्ती की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। शिक्षा मंत्री ने सदन में बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2621 बीएड सहायक शिक्षकों को बर्खास्त किया गया, जिनमें से 1319 पदों पर डी.एड अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि 1302 पद अब भी रिक्त हैं। इन शेष पदों पर भर्ती कब होगी, इस पर सरकार की चुप्पी ने आंदोलन को और तेज कर दिया है।
डी.एड अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट द्वारा 26 सितंबर 2025 को पारित आदेश में सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभ्यर्थियों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने धरना स्थल पर पहुंचकर अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनके आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने सरकार पर युवाओं के साथ छल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से पहले किए गए वादों को अब भुलाया जा रहा है। अनशन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने मौन व्रत रखकर भी विरोध दर्ज कराया।
कुल मिलाकर, सहायक शिक्षक भर्ती का यह मुद्दा अब केवल रोजगार का नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और जवाबदेही का सवाल बन चुका है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों पर असर पड़ने की आशंका है।
