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June 15, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

सरकारी आदेश से मचा प्रशासनिक विवाद, छात्रावास अधीक्षक को सौंपा गया राजस्व अधिकारी का प्रभार

कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार के एक आदेश ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। मामला कोरबा नगर निगम से जुड़ा है, जहां एक छात्रावास अधीक्षक को प्रतिनियुक्ति पर सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर पदस्थ कर दिया गया है। इस फैसले के सामने आने के बाद से प्रशासनिक हलकों में लगातार चर्चा का दौर जारी है और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत के अंतर्गत संचालित बालक छात्रावास कटगोड़ी में पदस्थ छात्रावास अधीक्षक सचिन तिवारी को प्रतिनियुक्ति पर नगर पालिक निगम कोरबा भेजा गया है। उन्हें वहां सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर कार्यभार सौंपा गया है। इतना ही नहीं, उन्हें निगम में संपदा अधिकारी की जिम्मेदारी भी दे दी गई है, जो कि उनके मूल कार्यक्षेत्र से बिल्कुल अलग मानी जा रही है।

बताया जा रहा है कि इस प्रतिनियुक्ति के लिए आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था। इसके बाद राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2 दिसंबर 1988 को जारी परिपत्र के प्रावधानों के तहत आदेश जारी कर सचिन तिवारी को अस्थायी रूप से नगर पालिक निगम कोरबा में सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर पदस्थ करने की अनुमति दी। यह आदेश नवा रायपुर अटल नगर से जारी किया गया है, जिस पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अवर सचिव अजय तिर्की के डिजिटल हस्ताक्षर हैं।

हालांकि इस नियुक्ति के बाद प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि राजस्व और संपदा से जुड़े मामलों में भूमि अभिलेख, कर निर्धारण और निगम की संपत्तियों के प्रबंधन जैसे जटिल कार्य शामिल होते हैं। ऐसे में छात्रावास अधीक्षक को सीधे इस तरह की जिम्मेदारी सौंपना कई लोगों को हैरान करने वाला निर्णय लग रहा है।

इसके अलावा कोरबा नगर निगम के भीतर भी यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या विभाग में योग्य और अनुभवी अधिकारी उपलब्ध नहीं थे, जिनकी जगह इस तरह की प्रतिनियुक्ति की जरूरत पड़ी। जानकारों का मानना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में इस तरह के फैसले न केवल कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि इससे व्यवस्था की पारदर्शिता और दक्षता पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल यह मामला कोरिया से लेकर कोरबा और राजधानी रायपुर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं सरकार के इस आदेश ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

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