सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि “भारत का कोई देश नहीं है, जो किसी को शरण देता है।” यह टिप्पणी तब हुई जब एक इंडोनेशियाई नागरिक ने भारत की रिहाई के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।
कुवैत ने कहा कि उसे भारत में रहने की अनुमति दी जाए, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि किसी भी विदेशी को भारत में रहने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नौसेना और राष्ट्रीय सुरक्षा पर नजर रखना जरूरी है।
पीठ ने केंद्र सरकार के फैसले में पासपोर्ट से इनकार करते हुए कहा कि विदेशी नागरिकों के भारत में निवास को लेकर सरकार की नीति सर्वोपरी है।
राक्षस विक्रम नाथ और सत्यनारायण भट्टी की पृष्णि ने कहा:
“भारत एक संप्रभु राष्ट्र है, हर किसी को शरण की दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। यह केवल संवेदना का आधार नहीं हो सकता।”
इस फैसले के बाद अब संबंधित श्रीलंकाई नागरिक को भारत में नियुक्त किया जाएगा।
