April 17, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

8 महीने बाद कब्र से निकाली गई लाश: सर्पदंश मुआवजा घोटाले का खुलासा

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 18 महीने पहले दफनाए गए शव को कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमॉर्टम किया गया। इस जांच ने सुसाइड को सर्पदंश बताकर 3 लाख रुपये के मुआवजे की साजिश का पर्दाफाश किया। इस घोटाले में एक वकील, एक डॉक्टर और मृतक के परिवार के सदस्यों सहित 5 लोग शामिल हैं, जिनके खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। यह मामला स्थानीय विधायक सुषांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में उठाए जाने के बाद सुर्खियों में आया।

घटना का विवरण

मामला बोदी गांव के निवासी शिवकुमार घृतलहरे की मौत से जुड़ा है, जिनका निधन 14 नवंबर 2023 को हुआ था। 12 नवंबर 2023 को उन्हें उल्टी और मुंह से झाग निकलने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिवार ने दावा किया कि उनकी मौत सर्पदंश से हुई थी, और इसके आधार पर एक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें सर्पदंश को मौत का कारण बताया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर परिवार ने सरकार की सर्पदंश पीड़ितों के लिए दी जाने वाली 3 लाख रुपये की मुआवजा राशि का दावा किया।

हालांकि, पुलिस को इस मामले में संदेह हुआ। प्रारंभिक जांच में मृतक के शरीर पर सर्पदंश के कोई निशान नहीं मिले। गहन जांच के बाद पता चला कि शिवकुमार की मौत शराब और जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई थी, न कि सर्पदंश से। इसके बावजूद, फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के जरिए मुआवजा हड़पने की कोशिश की गई।

साजिश के सूत्रधार

पुलिस जांच में इस साजिश का मास्टरमाइंड वकील कामता प्रसाद साहू को बताया गया है। साहू ने कथित तौर पर मृतक के परिवार को गलत बयान देने के लिए उकसाया और फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। डॉ. प्रियंका सोनी पर भी फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जारी करने का आरोप है। इसके अलावा, परिवार के तीन अन्य सदस्य भी इस साजिश में शामिल पाए गए। पुलिस ने सभी के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक साजिश), और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

दोबारा पोस्टमॉर्टम और खुलासा

संदेह के आधार पर बिलासपुर पुलिस ने कोर्ट से अनुमति लेकर 18 महीने बाद शिवकुमार के शव को कब्र से निकाला। दोबारा पोस्टमॉर्टम में साफ हुआ कि शरीर पर सर्पदंश के कोई निशान नहीं थे, और मौत का कारण जहर था। इस जांच ने साजिश को पूरी तरह बेनकाब कर दिया, जिसका मकसद सर्पदंश पीड़ितों के लिए दी जाने वाली मुआवजा राशि को हड़पना था।

सामाजिक और कानूनी प्रभाव

इस मामले ने बिलासपुर में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। एक वकील और डॉक्टर जैसे पेशेवरों की संलिप्तता ने लोगों के बीच अविश्वास की भावना को जन्म दिया है। स्थानीय लोग दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बिलासपुर SSP राजनेश सिंह ने कहा, “हम इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। सभी दोषियों को कठोर सजा दी जाएगी।” पुलिस ने जब्त दस्तावेजों और बयानों की जांच शुरू कर दी है, ताकि इस साजिश के और तार उजागर किए जा सकें।

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