भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 जून 2025 को रेपो रेट में 0.50% की कटौती की घोषणा की, जिससे यह 5.5% हो गया है। यह 2025 में तीसरी बार ब्याज दर में कमी है, जिसका सीधा फायदा होम, ऑटो और पर्सनल लोन लेने वालों को होगा। उदाहरण के लिए, 20 साल के ₹20 लाख के होम लोन पर करीब ₹1.48 लाख की बचत हो सकती है, और मासिक EMI में ₹620 की कमी आ सकती है। हालांकि, यह कटौती सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर रिटर्न को प्रभावित कर सकती है, जिससे बचतकर्ताओं को कम ब्याज मिलेगा। RBI ने अपनी नीति को ‘अकॉमोडेटिव’ से ‘न्यूट्रल’ में बदला है, जो भविष्य में और कटौती पर निर्भर करेगा।
रेपो रेट में कमी:
RBI ने 4-6 जून 2025 की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 6% से घटाकर 5.5% किया। यह 2025 में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती है, जिसमें फरवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती शामिल है। लोन पर प्रभाव: बैंकों के लिए उधार लेना सस्ता होने से होम लोन की ब्याज दरें 8% से नीचे आ सकती हैं, जो 2022 के बाद सबसे निचला स्तर होगा। 20 साल के ₹20 लाख के लोन पर EMI ₹15,534 से घटकर ₹14,914 हो सकती है, जिससे कुल ब्याज में ₹1.48 लाख की बचत होगी। बचतकर्ताओं पर असर: बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट और बचत खातों की ब्याज दरें पहले ही 30-70 बेसिस पॉइंट्स घटाई हैं। नई कटौती से FD की दरें और कम हो सकती हैं, जिससे बचतकर्ताओं को कम रिटर्न मिलेगा। आर्थिक प्रभाव: RBI ने 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 6.5% पर बरकरार रखा है, जबकि CPI मुद्रास्फीति को 4% से घटाकर 3.7% अनुमानित किया है। यह कटौती उपभोक्ता खर्च और निजी निवेश को बढ़ावा देगी। कैश रिजर्व रेशियो (CRR): RBI ने CRR को 100 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 3% किया, जिससे बैंकिंग सिस्टम में ₹2.5 लाख करोड़ की नकदी आएगी। इससे बैंकों की उधार देने की क्षमता बढ़ेगी। क्या करें उपभोक्ता?उधारकर्ता: फ्लोटिंग रेट लोन लेना बेहतर हो सकता है, क्योंकि ब्याज दरें और कम हो सकती हैं। पुराने लोन को रिफाइनेंस करने या प्रीपेमेंट पर विचार करें। बचतकर्ता FD की दरें कम होने से पहले लंबी अवधि की FD में निवेश करें। म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश विकल्पों पर विचार करें।
