भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गोल्ड लोन के नियमों में बड़ा बदलाव कर छोटे कर्जदारों को तोहफा दिया है। अब ₹2.5 लाख तक के गोल्ड लोन पर लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात 75% से बढ़ाकर 85% कर दिया गया है। यानी, अगर आपके सोने की कीमत ₹1 लाख है, तो आपको ₹85,000 तक का कर्ज मिल सकता है। यह बदलाव ग्रामीण और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए वित्तीय जरूरतें पूरी करने का सुनहरा मौका देगा। नए नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे।
क्या हैं नए नियम?
RBI ने 6 जून 2025 को गोल्ड लोन के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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₹2.5 लाख तक का लोन: 85% LTV, यानी ₹1 लाख के सोने पर ₹85,000 तक कर्ज।
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₹2.5 से ₹5 लाख का लोन: 80% LTV लागू।
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₹5 लाख से अधिक का लोन: 75% LTV और क्रेडिट मूल्यांकन जरूरी।
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केवल आभूषण और सिक्के: लोन के लिए 22 कैरेट या उससे अधिक शुद्धता वाले सोने के आभूषण और बैंक द्वारा जारी सिक्के ही मान्य। सोने की छड़ें या गोल्ड ETF नहीं चलेंगे।
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1 किलो की सीमा: प्रति कर्जदार अधिकतम 1 किलो सोना गिरवी रखा जा सकता है, जिसमें 50 ग्राम तक सिक्के शामिल हो सकते हैं।
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पारदर्शी प्रक्रिया: सोने का मूल्यांकन कर्जदार की मौजूदगी में होगा। कर्ज चुकाने के बाद 7 दिन में सोना लौटाना जरूरी, वरना बैंकों/NBFC पर ₹5,000 प्रतिदिन का जुर्माना।
क्यों जरूरी था बदलाव?
पिछले साल सितंबर 2024 में RBI ने गोल्ड लोन में अनियमितताएं पकड़ी थीं, जैसे तीसरे पक्ष द्वारा मूल्यांकन, बिना सूचना के सोने की नीलामी और LTV नियमों का उल्लंघन। जनवरी 2025 तक गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 76.9% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ हो गया। इस तेज वृद्धि को नियंत्रित करने और छोटे कर्जदारों को राहत देने के लिए RBI ने वित्त मंत्रालय के सुझाव पर LTV में ढील दी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की मांग के बाद ₹2 लाख तक के लोन पर सख्त नियमों से छूट दी गई।
कर्जदारों को क्या फायदा?
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ज्यादा कर्ज: ₹1 लाख के सोने पर अब ₹85,000 (पहले ₹75,000) तक लोन मिलेगा, जिससे आपात स्थिति में ज्यादा नकदी मिलेगी।
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पारदर्शिता: मूल्यांकन कर्जदार के सामने होगा, जिससे धोखाधड़ी का खतरा कम होगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में राहत: छोटे किसान, दुकानदार और मध्यम वर्ग के लिए कर्ज लेना आसान होगा।
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चुनौतियां: लोन रिन्यूअल के लिए अब पूरा कर्ज और ब्याज चुकाना होगा। प्रोसेसिंग और दोबारा मूल्यांकन की फीस से लागत बढ़ सकती है।
