मुंबई: उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बैंक ऑफ इंडिया ने उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित कर दिया है। बैंक ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने ₹700 करोड़ के लोन का गलत इस्तेमाल किया और इस राशि का बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश किया गया। यह कार्रवाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा RCom के ₹31,580 करोड़ के लोन को फ्रॉड घोषित करने के बाद दूसरा बड़ा झटका है।
क्या है मामला?
बैंक ऑफ इंडिया की ओर से दाखिल नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 2016 में लिए गए ₹700 करोड़ के लोन का दुरुपयोग किया। बैंक का दावा है कि इस राशि का उपयोग कंपनी के लिए निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य कार्यों में किया गया, जिसमें से आधे से ज्यादा पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट में डाल दिया गया। यह फंड डायवर्जन का स्पष्ट मामला है, जिसके चलते बैंक ने अकाउंट को फ्रॉड की श्रेणी में डाल दिया।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
इससे पहले जुलाई 2025 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने RCom के ₹31,580 करोड़ के लोन को फ्रॉड घोषित किया था, जिसमें अनिल अंबानी पर फंड के गलत इस्तेमाल और बैंकिंग सिस्टम के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगा था। इसके अलावा, सेबी ने भी अनिल अंबानी की रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कैपिटल पर ₹18.28 बिलियन के निवेशकों के नुकसान का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। सेबी के दस्तावेजों के अनुसार, अंबानी की फंड हाउस ने यस बैंक के सिक्योरिटीज में निवेश किया था ताकि बदले में लोन प्राप्त किया जा सके।
कानूनी कार्रवाई और सवाल
बैंक ऑफ इंडिया ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व निदेशक अनिल अंबानी के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि, इस मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ₹700 करोड़ की वसूली कैसे होगी और क्या अनिल अंबानी को जेल की सजा जैसी सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि जेट एयरवेज के नरेश गोयल के मामले में हुआ था।
रिलायंस कम्युनिकेशंस का पतन
रिलायंस कम्युनिकेशंस, जो कभी टेलीकॉम सेक्टर की अग्रणी कंपनी थी, पिछले कुछ वर्षों में भारी कर्ज और वित्तीय अनियमितताओं के चलते दिवालिया हो चुकी है। कंपनी पर बैंकों का हजारों करोड़ का कर्ज बकाया है, और अब फ्रॉड के इन नए आरोपों ने अनिल अंबानी की साख को और नुकसान पहुंचाया है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अनिल अंबानी के लिए और चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि कई बैंक और नियामक संस्थाएं अब उनके खिलाफ सख्त रुख अपना रही हैं। इस मामले में अगली कानूनी कार्रवाई और रिलायंस कम्युनिकेशंस की देनदारियों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि जांच में और क्या खुलासे होते हैं।
