पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 12 जून 2025 को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित ‘फाइट अगेंस्ट ग्लोबल वार्मिंग कैंपेन’ कार्यक्रम में शिरकत की।
इस कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ एवं छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि आज का युग शिक्षा और पर्यावरण दोनों के संरक्षण का है। उन्होंने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों ने शिक्षा के प्रसार में जो योगदान दिया है, वह सराहनीय है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के लक्ष्य को लेकर एक विस्तृत विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किया है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प से प्रेरित है।
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज वैश्विक संकट बन चुके हैं। भारत सरकार ने 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है और छत्तीसगढ़ इस दिशा में सक्रिय भागीदार है। राज्य की नई औद्योगिक नीति के तहत ऊर्जा क्षेत्र में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त होना, इस बात का प्रमाण है कि राज्य ग्रीन एनर्जी की दिशा में अग्रसर है।
श्री साय ने पर्यावरणीय जागरूकता के लिए चलाए जा रहे नवाचारों का भी उल्लेख किया, जिनमें “एक पेड़ माँ के नाम” और “पीपल फॉर पीपुल” जैसे अभियान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष चार करोड़ पौधे रोपे गए और आगामी वर्षों में 11 लाख पीपल के वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने पर बल दिया और कहा कि यह भविष्य को स्वच्छ, सुरक्षित और सतत बनाने की दिशा में सबसे प्रभावी कदम होगा। मुख्यमंत्री ने उपस्थित शिक्षकों, आयोजकों और समाज के सभी जागरूक नागरिकों का आभार जताया और इस मुहिम को जन-आंदोलन का रूप देने की अपील की।
इस अवसर पर कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के अध्यक्ष श्री सुबोध राठी, सचिव श्री मनोज पाण्डेय तथा अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
