April 17, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“इंजीनियर से कृषक बनी वल्लरी की स्ट्रॉबेरी क्रांति: बांस की टनल से सिंचाई कम, मुनाफा ज़्यादा!”

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की वल्लरी साहू ने वह कर दिखाया है, जो आमतौर पर सिर्फ सपनों में ही सोचा जाता है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर एक प्रतिष्ठित नौकरी करने वाली वल्लरी ने अचानक नौकरी को अलविदा कहकर किसानी की राह चुनी—वह भी पारंपरिक खेती नहीं, बल्कि आधुनिक और नवाचार से भरपूर।

वल्लरी ने बांस से बनाई गई “लो टनल” तकनीक का उपयोग कर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। यह तकनीक खासतौर पर उन क्षेत्रों में कारगर मानी जाती है, जहां जल संकट होता है। इस लो टनल सिस्टम के जरिए न केवल पौधों को तेज धूप और कीटों से बचाया जाता है, बल्कि पानी की खपत भी बहुत कम हो जाती है। नतीजा—कम लागत, अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता की स्ट्रॉबेरी।

वल्लरी की खेती सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन गई है। उनकी स्ट्रॉबेरी फार्मिंग यूनिट ने अब तक लगभग 35 स्थानीय लोगों को रोजगार दे दिया है, जिनमें कई महिलाएं भी शामिल हैं। यह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला कदम है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी है।

वल्लरी बताती हैं कि उन्होंने यूट्यूब और कृषि विशेषज्ञों से सीख लेकर खुद बांस की टनल बनाना सीखा और धीरे-धीरे खेतों में इसे लागू किया। आज उनके खेत की स्ट्रॉबेरी न सिर्फ स्थानीय बाजार में बिकती है, बल्कि ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए रायपुर और भिलाई जैसे शहरों में भी पहुंच रही है।

वल्लरी की यह कहानी बताती है कि अगर हिम्मत और सोच में बदलाव हो, तो मिट्टी से सोना भी उगाया जा सकता है। एक इंजीनियर द्वारा चुनी गई यह हरियाली की राह अब आने वाले युवाओं को नई दिशा देने वाली है।

 

 

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