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October 24, 2026
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हंसी के शब्दों को विराम: पद्मश्री कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन, साहित्य में शोक

 

भारत के साहित्य जगत ने 26 जून 2025 को एक अमूल्य रत्न खो दिया। हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में दशकों तक अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन हो गया। यह समाचार पूरे देश में शोक की लहर लेकर आया, खासकर उन लाखों लोगों के लिए जो उनकी कविताओं में जीवन की सच्चाई और मुस्कान तलाशते थे।

डॉ. दुबे सिर्फ एक कवि नहीं थे, बल्कि वे मंच के ऐसे जादूगर थे जिनकी हास्य कविताएं लोगों को हंसी के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर देती थीं। उन्होंने हिंदी कविता को जन-जन तक पहुँचाया और उसे लोकप्रियता की नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। हास्य को हल्केपन से निकालकर उन्होंने उसे गंभीर सामाजिक टिप्पणियों का माध्यम बना दिया।

उनके निधन पर भाजपा नेता उज्ज्वल दीपक सहित कई राजनेताओं और साहित्यकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया। उज्ज्वल दीपक ने कहा, “डॉ. दुबे जैसे कवि युगों में एक बार जन्म लेते हैं। उनका लेखन और व्यक्तित्व दोनों प्रेरणादायक थे।”

साहित्यिक मंचों से लेकर टेलीविजन तक, डॉ. सुरेंद्र दुबे ने हिंदी हास्य कविता को घर-घर तक पहुँचाया। उनकी अनुपस्थिति साहित्य की दुनिया में एक गहरी खाली जगह छोड़ गई है, जिसे भरना मुश्किल है।

उनकी स्मृति में अनेक साहित्यिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां कवियों और श्रोताओं ने उनके लोकप्रिय छंदों को दोहराकर उन्हें याद किया।

 

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