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October 21, 2026
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INS निस्तार: भारत का स्वदेशी ‘समुद्री रक्षक’ नौसेना में शामिल, 300 मीटर गहराई में बचाएगा जिंदगियां

विशाखापत्तनम: भारतीय नौसेना ने अपनी ताकत में एक नया आयाम जोड़ा, जब स्वदेश निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS निस्तार को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में आयोजित समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस 10,000 टन के विशाल जहाज को नौसेना को सौंपा। यह वेसल 300 मीटर की गहराई तक रेस्क्यू ऑपरेशन करने में सक्षम है, जो भारत की समुद्री ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

INS निस्तार की ताकत

INS निस्तार भारत का पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल है, जिसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है। यह जहाज गहरे समुद्र में पनडुब्बी बचाव, गोताखोरी मिशन और आपदा राहत कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अत्याधुनिक डीप सी डाइविंग सिस्टम इसे 300 मीटर की गहराई तक ऑपरेशन करने में सक्षम बनाते हैं। 80% स्वदेशी सामग्री और 120 MSME की भागीदारी के साथ निर्मित यह जहाज ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जीता-जागता उदाहरण है।

क्या है खास?

  • वजन और क्षमता: 10,000 टन का यह जहाज गहरे समुद्र में जटिल बचाव कार्यों के लिए तैयार किया गया है।
  • रेस्क्यू सिस्टम: यह पनडुब्बियों और जहाजों में फंसे लोगों को बचाने के लिए विशेष उपकरणों से लैस है।
  • मानवीय सहायता: समुद्री आपदाओं में राहत और बचाव कार्यों में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • स्वदेशी तकनीक: जहाज का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ, जिसमें स्थानीय उद्योगों की बड़ी भागीदारी रही।

रक्षा मंत्री का बयान

समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा, “INS निस्तार भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और स्वदेशी तकनीक का शानदार उदाहरण है। यह जहाज न केवल हमारी समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करेगा, बल्कि गहरे समुद्र में जिंदगियां बचाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।” नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने इसे ‘नौसेना की परिचालन क्षमता में मील का पत्थर’ बताया।

निर्माण की कहानी

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने इस जहाज को बनाने में कई तकनीकी चुनौतियों का सामना किया। फिर भी, स्वदेशी तकनीक और MSME के सहयोग से इसे समय पर पूरा किया गया। इस परियोजना में 80% से अधिक सामग्री और उपकरण भारत में ही निर्मित किए गए, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।

नौसेना की रणनीति

INS निस्तार पूर्वी नौसेना कमान का हिस्सा होगा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति को और मजबूत करेगा। यह जहाज न केवल रक्षा कार्यों में, बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। नौसेना ने भविष्य में और अधिक स्वदेशी जहाजों को शामिल करने की योजना बनाई है, ताकि समुद्री ताकत को और बढ़ाया जा सके।

आत्मनिर्भर भारत की जीत

INS निस्तार का निर्माण भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाता है। यह जहाज न केवल नौसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि अन्य देशों को भी भारत की स्वदेशी तकनीक की क्षमता का संदेश देगा। 

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