मध्यप्रदेश में बेरोज़गारी की दर दिनोंदिन खतरनाक होती जा रही है। रोजगार पोर्टल पर दर्ज आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के लगभग 25.68 लाख युवाओं ने नौकरी की आस में अपना पंजीयन कराया है। लेकिन यह केवल आधिकारिक संख्या है — ज़मीनी सच्चाई इससे कहीं अधिक गंभीर है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस विकराल होती समस्या पर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि युवाओं को केवल आश्वासन मिल रहे हैं, वास्तविक अवसर नहीं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वो “नाम बदलने” की राजनीति कर रही है लेकिन “काम” करने से बच रही है।
कमलनाथ ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि सरकार ने बेरोज़गार शब्द को “आकांक्षी युवा” में बदल दिया है। उन्होंने कहा, “क्या शब्द बदलने से युवाओं का जीवन बदल जाएगा? उन्हें तो नौकरी, आत्मनिर्भरता और सम्मान चाहिए — न कि शब्दों की बाज़ीगरी।”
सरकार ने 2025 में केवल 87,000 युवाओं को नौकरी देने का लक्ष्य रखा है। कमलनाथ ने इसे “न्याय का मज़ाक” बताया और कहा कि यह लक्ष्य अपने आप में उन लाखों बेरोज़गार युवाओं के साथ अन्याय है, जो वर्षों से नौकरियों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से यह स्पष्ट मांग की कि वह रोजगार को अपने घोषणापत्र का हिस्सा भर न बनाए, बल्कि व्यावहारिक उपायों पर अमल करे। कमलनाथ ने सुझाव दिया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को बढ़ावा देना, स्थानीय व्यापारों को सशक्त करना और सरकारी रिक्तियों को जल्द भरना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमारा प्रदेश तभी तरक्की करेगा जब हमारे युवाओं को रोज़गार मिलेगा। आज का युवा केवल वादे नहीं, अवसर चाहता है।”
