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October 21, 2026
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बांग्लादेश में इतिहास पलटा: शेख हसीना के पिता अब ‘राष्ट्रपिता’ नहीं, नोटों से तस्वीर भी हटाई

बांग्लादेश की राजनीति में इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव सामने आया है। देश के संस्थापक नेता और प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान को अब आधिकारिक तौर पर ‘राष्ट्रपिता’ (Father of the Nation) नहीं माना जाएगा। सरकार ने यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की परिभाषा में बदलाव के साथ किया है।

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब तीन दिन पहले ही बांग्लादेश बैंक ने नई करेंसी जारी की, जिसमें शेख मुजीब की तस्वीर ग़ायब थी। इसे लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है।

क्या-क्या बदला गया है?

सरकारी दस्तावेजों, स्कूली पाठ्यक्रमों और पोस्टर्स से “राष्ट्रपिता” शब्द हटाया जाएगा।

1971 की मुक्ति संग्राम से जुड़े ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ की नई लिस्ट में कई पुराने नाम नहीं हैं, जिनमें मुजीब समर्थक नेता भी शामिल थे।

विपक्ष का आरोप:

“इतिहास मिटाया जा रहा है”, यह एक राजनीतिक प्रतिशोध है।

सत्ताधारी गठबंधन की दलील: “ऐतिहासिक सच्चाई और दस्तावेज़ आधारित सुधार” किया गया है।

विरोधियों का तीखा हमला:

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP ने कहा:

> “मुजीब को हटाना एक प्रतीकात्मक फैसला नहीं, राष्ट्रीय विचारधारा में बदलाव का संकेत है।”

छात्र संगठनों और बुद्धिजीवियों ने ढाका यूनिवर्सिटी और प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की।

सरकार का पक्ष:

सरकार की ओर से कहा गया है कि यह कदम “राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को नया दृष्टिकोण” देने के लिए लिया गया है।
सूचना मंत्रालय ने कहा:

“अब सिर्फ वही लोग स्वतंत्रता सेनानी माने जाएंगे जिनके पास प्रामाणिक युद्ध रिकॉर्ड होंगे।”

तीन दिन, तीन झटके:

1. 1 जून: शेख मुजीब की फोटो के बिना नए नोट जारी हुए।

2. 2 जून: शिक्षा विभाग ने “राष्ट्रपिता” शब्द हटाने का आदेश दिया।

3. 4 जून: नई स्वतंत्रता सेनानी सूची में बड़े नाम हटे।

 

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