एक चौंकाने वाले फैसले में हाईकोर्ट ने एक पति को तलाक की मंजूरी दी है, क्योंकि उसकी पत्नी का गैरमर्द से अफेयर था। महिला फेसबुक पर अपने प्रेमी के साथ अश्लील बातचीत करती थी और दो बार उसके साथ घर से भाग भी गई थी। कोर्ट ने इसे पति के आत्मसम्मान और मानसिक शांति पर गंभीर प्रहार माना।
क्या था मामला?
पति ने कोर्ट में दावा किया कि उसकी पत्नी का फेसबुक पर प्रेमी से लगातार संपर्क था।उन्होंने कोर्ट को अश्लील चैट्स और तस्वीरें बतौर सबूत सौंपीं।महिला दो बार अपने प्रेमी के साथ घर से भागी, जिससे परिवार और समाज में बदनामी हुई।
कोर्ट का क्या कहना था?
हाईकोर्ट ने माना कि यह वैवाहिक विश्वास का उल्लंघन है।
पति का मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक अपमान तलाक के लिए पर्याप्त आधार हैं।
कोर्ट ने साफ कहा –
“पति को अपनी गरिमा और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है।”
कानूनी नज़रिया
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत, विवाह में विश्वासघात, अनैतिक आचरण और मानसिक क्रूरता को तलाक के वैध आधार माना गया है।
क्या सीख है इससे?
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई बातचीत भी अब कानूनी सबूत मानी जाती है।विवाह में पारदर्शिता और वफादारी कानूनी रूप से अनिवार्य होती जा रही है।कोर्ट अब केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक धोखे को भी गंभीरता से ले रहा है।
