छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार, 5 जून 2025 को सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन में नक्सलियों के केंद्रीय समिति के सदस्य और शिक्षा प्रमुख नरसिंह चालम उर्फ गौतम उर्फ सुधाकर को मार गिराया। सुधाकर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था और वह दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सली शिक्षा केंद्रों का संचालक था। उसने बच्चों और युवाओं को ‘अ’ से ‘असलहा’ और ‘ब’ से ‘बंदूक’ सिखाने के लिए सिलेबस तैयार किया था, जिसका मकसद उन्हें नक्सली विचारधारा में ढालना और हथियार चलाने के लिए तैयार करना था।
सुधाकर, जो तेलंगाना के चिंतापलुडी गांव का रहने वाला था, पिछले तीन दशकों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। वह हाल ही में छुट्टी से लौटा था और बस्तर में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश में था। बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र में डीआरजी और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर यह ऑपरेशन चलाया। मुठभेड़ के दौरान सुधाकर के पास से एक एके-47 राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने बताया कि यह ऑपरेशन नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता है। सुधाकर की मौत से सीपीआई (माओवादी) के नेटवर्क को गहरा झटका लगा है। पिछले महीने ही अबूझमाड़ में 1.5 करोड़ के इनामी नक्सली नेता बसवराजू के मारे जाने के बाद यह दूसरा बड़ा ऑपरेशन है।
विवादास्पद सिलेबस और ब्रेनवॉश की रणनीति:
सुधाकर ने नक्सली पाठशालाओं में बच्चों को वामपंथी विचारधारा, माओवाद और नक्सल नेताओं के इतिहास के बारे में सिखाने का सिलेबस बनाया था। इन पाठशालाओं में बच्चों को पुलिस और सरकार के खिलाफ भड़काने के लिए अत्याचार की कहानियां सुनाई जाती थीं, ताकि उनका ‘ब्रेनवॉश’ कर उन्हें हथियार थमाया जा सके।

नक्सलियों के खिलाफ तेज अभियान:
केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस साल अब तक बस्तर संभाग में 188 नक्सलियों को मारा जा चुका है, 706 गिरफ्तार हुए हैं, और 733 ने आत्मसमर्पण किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुठभेड़ को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक और मील का पत्थर बताया है।
आगे की रणनीति:
सुरक्षा बलों ने बीजापुर और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। डीआरजी और सीआरपीएफ की टीमें जंगलों में गश्त कर रही हैं, ताकि नक्सली गतिविधियों पर और काबू पाया जा सके। स्थानीय निवासियों को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए भी सरकार कई योजनाएं चला रही है, ताकि नक्सलियों का समर्थन आधार कमजोर हो।
