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October 24, 2026
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ईरान में फंसे 1500 भारतीय छात्रों की वतन वापसी: आर्मेनिया के रास्ते निकासी, इजराइल-ईरान टकराव के बीच राहत की खबर

तेहरान. इजराइल और ईरान के बीच छिड़े तनावपूर्ण युद्ध ने पूरी दुनिया की निगाहें मध्य-पूर्व पर टिका दी हैं। इस बीच, ईरान के विभिन्न शहरों में फंसे करीब 1500 भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। भारत सरकार ने तेहरान में भारतीय दूतावास के जरिए इन छात्रों को सुरक्षित निकालने की कवायद तेज कर दी है। ईरान ने भारत के अनुरोध पर अपने जमीनी बॉर्डर खोल दिए हैं, जिससे छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते स्वदेश लाया जा सकेगा।

क्या है पूरा मामला?

पिछले तीन दिन से इजराइल और ईरान के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं। इजराइल ने शुक्रवार को ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ के तहत ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें दागीं। इस जंग ने ईरान के हवाई क्षेत्र को पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे वहां फंसे विदेशी नागरिकों की निकासी मुश्किल हो गई।

ईरान के तेहरान, शीराज और कोम जैसे शहरों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर के छात्रों की तादाद ज्यादा है। ये छात्र मुख्य रूप से मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए ईरान गए थे। युद्ध शुरू होने के बाद से ये डरे हुए हैं और भारत सरकार से सुरक्षित निकाले जाने की गुहार लगा रहे थे।

भारत का रेस्क्यू प्लान

भारत सरकार ने 15 जून को ईरानी विदेश मंत्रालय से औपचारिक अनुरोध किया था कि भारतीय छात्रों को जमीनी रास्तों से आर्मेनिया ले जाया जाए। ईरान ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए अपने सभी लैंड बॉर्डर खोल दिए हैं। ईरान ने भारत से फंसे हुए नागरिकों का विवरण मांगा है, जिसमें नाम, पासपोर्ट नंबर, यात्रा का समय और वाहन की जानकारी शामिल है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर ने बताया, “तेहरान में भारतीय दूतावास स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। कुछ छात्रों को ईरान के भीतर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। हम आर्मेनिया के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि निकासी प्रक्रिया सुचारु हो।” भारतीय और अर्मेनियाई दूतावास मिलकर इस मिशन को अंजाम दे रहे हैं।

छात्रों में डर का माहौल

ईरान में फंसे छात्रों ने बताया कि हमलों की आवाजें सुनकर उनकी नींद उड़ गई है। तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में पढ़ने वाली कश्मीरी छात्रा तबीया जहरा ने कहा, “रात 3:30 बजे धमाकों की आवाज से हम डर गए। हम सुरक्षित हैं, लेकिन कब तक? सरकार हमें जल्द निकाले।” वहीं, श्रीनगर के फैजान नबी ने बताया, “हमारे हॉस्टल के पास गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। परिवार वाले हर घंटे फोन कर रहे हैं।”

जम्मू-कश्मीर के सीएम का हस्तक्षेप

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात कर अपने क्षेत्र के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमारे बच्चे मुश्किल में हैं। केंद्र सरकार हरसंभव मदद कर रही है।

क्या है आगे की योजना?

भारत सरकार अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो अजरबैजान और तुर्कमेनिस्तान जैसे अन्य रास्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल, आर्मेनिया रूट को सबसे सुरक्षित और व्यवहारिक माना जा रहा है।

वैश्विक चिंता और आर्थिक प्रभाव

इजराइल-ईरान युद्ध ने न सिर्फ मध्य-पूर्व, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख दिया है। भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई, और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

पेरेंट्स की पुकार

श्रीनगर में कई अभिभावकों ने प्रदर्शन कर सरकार से अपने बच्चों को जल्द निकालने की मांग की। एक पिता ने कहा, “हमारी रातों की नींद उड़ गई है। हमारे बच्चे वहां जंग के बीच फंसे हैं। सरकार कुछ करे।”भारत सरकार की त्वरित कार्रवाई और ईरान के सहयोग से अब उम्मीद जगी है कि जल्द ही ये छात्र अपने वतन लौट सकेंगे।

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