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June 4, 2026
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छत्तीसगढ़

दुर्ग पुलिस का ‘ऑपरेशन तलाश’ चमत्कार: 24 दिन में 541 लापता लोग मिले, परिजनों की आंखों में खुशी की चमक

दुर्ग (छत्तीसगढ़), 26 जून 2025: दुर्ग पुलिस का ‘ऑपरेशन तलाश’ उन परिवारों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोने का दर्द सहा। मात्र 24 दिनों में पुलिस ने 541 गुमशुदा लोगों को उनके घरों तक पहुंचाया, जिससे परिजनों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। यह अभियान न केवल पुलिस की कार्यकुशलता का परिचय देता है, बल्कि समाज में विश्वास और इंसानियत की मिसाल भी बन गया है।’

ऑपरेशन तलाश’ की कहानी:

दुर्ग पुलिस ने गुमशुदा लोगों को खोजने के लिए ‘ऑपरेशन तलाश’ शुरू किया, जिसका उद्देश्य लापता बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य लोगों को उनके परिवारों से मिलाना है। इस अभियान में पुलिस ने तकनीक और समुदाय की ताकत को एकजुट किया। डीएसपी (अपराध) संतोष मिश्रा की अगुआई में गठित टीम ने दिन-रात एक कर इस मिशन को अंजाम दिया।

कामयाबी के पीछे का राज:
  • हाई-टेक ट्रैकिंग: पुलिस ने सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल डेटाबेस का इस्तेमाल कर गुमशुदा लोगों का सुराग लगाया।
  • सोशल मीडिया की ताकत: लापता लोगों की तस्वीरें और जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल की गईं, जिससे जनता के सहयोग से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले।
  • जमीनी सहयोग: स्थानीय लोग, एनजीओ और सामाजिक संगठनों ने पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
  • हेल्पलाइन की भूमिका: 24/7 सक्रिय हेल्पलाइन के जरिए परिजनों की शिकायतों पर तुरंत एक्शन लिया गया।
541 जिंदगियों की वापसी:

इस अभियान के तहत खोजे गए 541 लोगों में नन्हे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मानसिक रूप से अस्थिर लोग शामिल हैं। कई ऐसे थे, जो भटक गए थे या जिनके अपहरण की आशंका थी। पुलिस ने न केवल उन्हें सुरक्षित निकाला, बल्कि उनके परिजनों से मिलवाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कुछ मामलों में मानव तस्करी की आशंका सामने आई, जिनकी जांच तेजी से की जा रही है।

पुलिस अधीक्षक की जुबानी:

दुर्ग के एसपी ने कहा, “‘ऑपरेशन तलाश’ हमारा वादा है कि कोई भी परिवार अपने अपनों से बिछड़ने का दर्द न सहे। इसकी सफलता हमारी मेहनत और जनता के विश्वास का नतीजा है। हम इसे और मजबूत करेंगे।

अगला कदम:

दुर्ग पुलिस अब इस अभियान को और बड़े पैमाने पर ले जाने की तैयारी में है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तकनीकों के उपयोग की योजना बन रही है। साथ ही, इसे छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों और संभवतः राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने पर विचार चल रहा है

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