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June 4, 2026
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SCO में भारत का कड़ा रुख: राजनाथ ने PAK रक्षा मंत्री से नहीं की मुलाकात, बलूचिस्तान हमले का जिक्र पर पुंछ को नजरअंदाज करने पर दस्तखत से इनकार

किंगदाओ (चीन), 26 जून 2025: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर फिर से अपनी कठोर नीति का परिचय दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न केवल पाकिस्तानी रक्षा मंत्री से मुलाकात करने से इनकार किया, बल्कि साझा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से भी मना कर दिया। इसका कारण था दस्तावेज में जम्मू-कश्मीर के पुंछ में हुए आतंकी हमले का जिक्र न होना, जबकि बलूचिस्तान में हुए हमले को शामिल किया गया।

भारत ने इस दस्तावेज को आतंकवाद के मुद्दे को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखा, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर तैयार किया था। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति से कोई समझौता नहीं करेगा। राजनाथ सिंह ने बैठक में भारत के रुख को मजबूती से रखा और कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को वैश्विक मंचों पर बेनकाब करना जरूरी है।

पाकिस्तान से दूरी, चीन पर भी निशाना:

बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री से किसी भी तरह की औपचारिक या अनौपचारिक मुलाकात से परहेज किया। यह भारत की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों को खारिज करता है। इसके अलावा, सूत्रों ने बताया कि भारत ने चीन की उस कोशिश को भी नाकाम किया, जिसमें वह SCO के मंच का इस्तेमाल क्षेत्रीय मुद्दों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहा था।

पुंछ हमले का मुद्दा:

पुंछ में हाल ही में हुआ आतंकी हमला, जिसमें भारतीय सेना के जवान शहीद हुए थे, भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा है। भारत ने इस हमले को SCO के दस्तावेज में शामिल करने की मांग की थी, लेकिन पाकिस्तान और चीन के विरोध के कारण यह संभव नहीं हुआ। भारत ने इसे आतंकवाद को नजरअंदाज करने की साजिश के तौर पर देखा और दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

SCO में भारत की स्थिति मजबूत:

SCO में भारत की यह कठोर नीति न केवल आतंकवाद के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को भी रेखांकित करती है। राजनाथ सिंह ने बैठक में भारत के रक्षा और सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हुए साफ किया कि किसी भी देश के साथ सहयोग तभी संभव है, जब वह आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का सम्मान करे।

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