May 2, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

भारत माला घोटाले में बढ़ा कोर्ट का दबाव: अधिकारी न आए तो होगी कुर्की, कांग्रेस बोली- CBI जांच दो”

छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के मुआवजा वितरण को लेकर हुए घोटाले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। घोटाले में शामिल छह राजस्व अधिकारियों को विशेष कोर्ट ने सख्त अल्टीमेटम जारी किया है—अगर वे 29 जुलाई 2025 तक कोर्ट में पेश नहीं होते, तो उनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी और गैरजमानती वारंट (NBW) जारी किया जाएगा।

यह घोटाला रायपुर से विशाखापट्टनम तक बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान सामने आया, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारी-भरकम मुआवजा वसूला गया। जांच में सामने आया कि जमीनों को कई छोटे हिस्सों में बांटकर नकली नामों पर रजिस्ट्री की गई और असल किसानों को बेहद कम राशि दी गई।

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि जहां असली मुआवजा राशि करीब 29.5 करोड़ रुपये थी, उसे 78 करोड़ रुपये तक फुलाकर सरकारी खजाने से निकाला गया। इस घोटाले में न केवल राजस्व अधिकारी, बल्कि दलालों और प्रभावशाली रसूखदारों की भी भूमिका सामने आई है।

इस मामले में जो 6 अधिकारी फरार हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं:

निर्भय कुमार साहू (पूर्व SDM)

शशिकांत कुर्रे (तहसीलदार)

लखेश्वर प्रसाद किरण (नायब तहसीलदार)

जितेन्द्र कुमार साहू (पटवारी)

बसंती घृतलहरे (पटवारी)

लेखराम देवांगन (पटवारी)

कोर्ट ने BNSS की धारा 84 के तहत सभी को ‘उद्घोषणा’ जारी करते हुए चेताया कि यदि वे पेश नहीं होते, तो आगे संपत्ति जब्ती, गिरफ्तारी वारंट और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घोटाले को लेकर कांग्रेस ने राज्य और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार जानबूझकर रसूखदार लोगों को बचा रही है और इस पूरे प्रकरण की CBI जांच अनिवार्य है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत से असली किसानों को लूटा गया और भ्रष्ट अधिकारियों ने निजी लाभ कमाया।

 

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