महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उड़ान उस वक्त चर्चा में आ गई जब एयरलाइन के एक पायलट ने साफ तौर पर कहा – “अब मैं प्लेन नहीं उड़ाऊंगा, मेरी ड्यूटी खत्म हो चुकी है।”
यह बात सुनकर एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया। सुरक्षा अधिकारी, एयरलाइन स्टाफ और CM कार्यालय के लोग असमंजस में पड़ गए कि अब क्या होगा?
✈️ क्या है पूरा मामला?
गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को नागपुर एक महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम के लिए रवाना होना था। एयरपोर्ट पर उनका विशेष चार्टर्ड विमान तैयार था, सुरक्षा कड़ी थी, रनवे क्लियर था। बस उड़ान भरने की देरी थी। तभी एयरलाइन के पायलट ने अंतिम क्षण में विमान उड़ाने से इनकार कर दिया।
पायलट ने अपनी बात रखते हुए कहा –
“मेरी ड्यूटी टाइम पूरी हो चुकी है। अब मैं नियमों के अनुसार उड़ान नहीं भर सकता। यह फ्लाइट सेफ्टी के नियमों के खिलाफ होगा।”
🕐 ड्यूटी टाइम से क्या फर्क पड़ता है?
DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के नियमों के अनुसार, हर पायलट की ड्यूटी के घंटे तय होते हैं। इन्हें FDTL (Flight Duty Time Limitation) कहा जाता है। इसके अनुसार:
दिन में एक पायलट अधिकतम 8 से 10 घंटे तक ही ड्यूटी कर सकता है।
थकान की स्थिति में विमान उड़ाना हादसे का कारण बन सकता है।
अगर पायलट थका हुआ है, तो उसे उड़ान से हटना अनिवार्य होता है।
💬 एयरलाइन ने क्या किया?
स्थिति गंभीर होती देख एयरलाइन के वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आए। पायलट को फोन कर समझाने का प्रयास किया गया। बताया गया कि ये “वीवीआईपी” फ्लाइट है और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक है। लेकिन पायलट ने साफ कहा —
“नियम सबके लिए बराबर हैं, VIP हो या आम आदमी।”
हालांकि DGCA के नियमों में यह छूट भी है कि अगर कोई पायलट स्वेच्छा से और स्वस्थ महसूस करते हुए समयसीमा के थोड़े से अंतर में उड़ान भरने को तैयार हो, तो उसे अनुमति दी जा सकती है।यही बात पायलट को बताई गई।
